बिहार जमीन रिकॉर्ड सुधार: परिमार्जन (Parimarjan) और परिमार्जन प्लस का संपूर्ण विश्लेषण 2026
बिहार में भूमि सुधार के इतिहास में परिमार्जन (Parimarjan) और अब इसका उन्नत संस्करण परिमार्जन प्लस (Parimarjan Plus) एक डिजिटल क्रांति के रूप में उभरा है। बिहार जैसे राज्य में जहाँ ज़मीन के रिकॉर्ड्स दशकों पुराने थे, वहाँ डिजिटल रिकॉर्ड में गलतियाँ होना स्वाभाविक था। इन गलतियों को सुधारने के लिए अब आपको अंचल कार्यालय (Block) के चक्कर काटने की ज़रूरत नहीं है।
1. परिमार्जन (Parimarjan) पोर्टल की शुरुआत क्यों हुई?
मई 2020 में बिहार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस पोर्टल को लॉन्च किया। जब बिहार सरकार ने अपनी तमाम पंजी-2 (Register-II) को ऑनलाइन किया, तो डेटा एंट्री ऑपरेटरों की गलती या पुराने फटे हुए रिकॉर्ड्स के कारण डिजिटल जमाबंदी में भारी त्रुटियाँ पाई गईं।
मुख्य समस्याएँ जो सामने आईं:
- रैयत (मालिक) के नाम या पिता के नाम की स्पेलिंग गलत होना।
- खाता-खेसरा संख्या का गलत दर्ज हो जाना।
- कुल रकबा (Area) का कम या ज़्यादा शो करना।
- पुराना लगान (Tax) बकाया दिखना जबकि आपने रसीद कटवा ली हो।
2. परिमार्जन प्लस (Parimarjan Plus): नया और उन्नत वर्शन
पुराने परिमार्जन पोर्टल में आवेदनों का निपटारा बहुत धीमा था और पारदर्शिता की कमी थी। इसी को ध्यान में रखते हुए परिमार्जन प्लस लॉन्च किया गया, जो कि पूरी तरह से ऑटोमेटेड और समयबद्ध (Time-bound) है।
परिमार्जन vs परिमार्जन प्लस: मुख्य अंतर
| विशेषता | परिमार्जन (पुराना) | परिमार्जन प्लस (नया) |
|---|---|---|
| प्रक्रिया | मैनुअल हस्तक्षेप अधिक, धीमी गति। | पूरी तरह ऑटोमेटेड, तेज़ गति। |
| ट्रैकिंग (Tracking) | स्टेटस जानना मुश्किल था। | रियल-टाइम SMS और ऑनलाइन ट्रैकिंग। |
| जवाबदेही | अधिकारियों पर कोई समय सीमा नहीं थी। | 30-60 दिनों के भीतर निपटारा अनिवार्य। |
3. परिमार्जन प्लस के माध्यम से सुधार की श्रेणियाँ
आप निम्नलिखित समस्याओं के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं:
- रैयत के नाम में सुधार: यदि आपके नाम या पिता के नाम में कोई मात्रा या स्पेलिंग की गलती है।
- लगान संबंधी अशुद्धि: यदि आपकी ऑनलाइन रसीद पर लगान की राशि गलत दिख रही है।
- रकबा (Area) सुधार: यदि डिजिटल रिकॉर्ड में आपकी ज़मीन का क्षेत्रफल कम दर्ज है।
- छूटी हुई जमाबंदी: यदि आपकी पुरानी जमाबंदी (Offline) तो है लेकिन ऑनलाइन पोर्टल पर शो नहीं कर रही है।
4. ऑनलाइन आवेदन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
- पोर्टल पर जाएँ: बिहार भूमि की आधिकारिक वेबसाइट biharbhumi.bihar.gov.in पर जाएँ।
- लॉग इन: अपना मोबाइल नंबर डालें और OTP के ज़रिए लॉग इन करें।
- विवरण भरें: अपना जिला, अंचल, हल्का और मौजा चुनें।
- दस्तावेज अपलोड: साक्ष्य के रूप में पुरानी रसीद, केवाला या शुद्धि पत्र की PDF अपलोड करें।
- शपथ पत्र: एक स्व-घोषणा (Self-declaration) फॉर्म डाउनलोड करके भरें और अपलोड करें।
5. अधिकारियों की जवाबदेही और समय सीमा
परिमार्जन प्लस में प्रत्येक अधिकारी के लिए काम पूरा करने का समय तय है। राजस्व कर्मचारी पहले जांच करता है, फिर राजस्व अधिकारी (RO) अपनी रिपोर्ट देता है और अंत में अंचलाधिकारी (CO) इसे डिजिटल साइन के ज़रिए अप्रूव करते हैं। यदि 60 दिनों में काम नहीं होता, तो इसकी सूचना ऊपर के अधिकारियों को मिल जाती है।
6. बिहार जमीन सर्वे 2026 में परिमार्जन का महत्व
बिहार विशेष सर्वेक्षण (Special Survey) में आपकी वही ज़मीन आपके नाम से दर्ज होगी जो ऑनलाइन पोर्टल पर सही-सही दिख रही है। अगर आपकी जमाबंदी में रकबा गलत है, तो सर्वे में भी वह गलत दर्ज हो जाएगा। इसलिए **खानापूरी (Khanapuri)** से पहले परिमार्जन प्लस का उपयोग करना हर रैयत के लिए अनिवार्य है।
7. निष्कर्ष
परिमार्जन प्लस बिहार सरकार का एक क्रांतिकारी कदम है। यह बिचौलियों के चंगुल से किसानों को आज़ादी दिलाता है। अगर आप जागरूक रहकर अपनी ज़मीन के कागज़ात आज ही शुद्ध करवा लेते हैं, तो आने वाली पीढ़ी को कचहरी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। यह सुशासन का सबसे बड़ा उदाहरण है।