⚖️ कानूनी दस्तावेज पोर्टल: लीज एवं रेंट एग्रीमेंट ड्राफ्ट (Word/DOCX) — नए स्टांप व रजिस्ट्रेशन नियम 2026
📝 Verified Legal Drafting 2026

लीज एग्रीमेंट / किरायानामा (Rent Agreement) फॉर्मेट
Lease_Agreement.docx ड्राफ्ट व नए स्टांप दरें

मकान, दुकान, फ्लैट अथवा गोदाम किराए पर देने या लेने हेतु कानूनी सुरक्षा वाला संपूर्ण ड्राफ्ट। उत्तर प्रदेश एवं भारत सरकार के नवीनतम पंजीकरण नियमों के अनुसार।

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लीज एग्रीमेंट / किरायानामा (Word DOCX) टेम्पलेट

यह प्रारूप एडिटेबल Microsoft Word (.docx) फाइल में तैयार किया गया है। नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करते ही आपके मोबाइल या कंप्यूटर में Lease_Agreement.docx तुरंत डाउनलोड हो जाएगा।

1. वैध लीज / रेंट एग्रीमेंट क्यों आवश्यक है?

चाहे आप मकान मालिक (Lessor) हों या किराएदार (Lessee), बिना लिखित और कानूनी रूप से प्रमाणित एग्रीमेंट के प्रॉपर्टी किराए पर देना भारी विवाद और वित्तीय नुकसान का कारण बन सकता है:

  • अवैध कब्जे से सुरक्षा: स्पष्ट अनुबंध यह सिद्ध करता है कि किराएदार को केवल एक सीमित समय के लिए उपभोग का अधिकार मिला है, स्वामित्व नहीं।
  • किराया व सिक्योरिटी की सुरक्षा: तय समय पर मासिक किराया, बिजली-पानी बिल भुगतान और एडवांस धरोहर राशि (Security Deposit) की वापसी के नियम पहले से तय रहते हैं।
  • पुलिस वेरिफिकेशन व कानूनी पहचान: सरकारी विभागों, पासपोर्ट आवेदन, बैंक खाता खोलने और पुलिस सत्यापन में पंजीकृत रेंट एग्रीमेंट अनिवार्य होता है।
💡 11 महीने का नियम (The 11-Month Rule): भारतीय पंजीकरण अधिनियम 1908 के तहत 12 महीने से कम के अनुबंध पर अनिवार्य पंजीकरण नहीं होता। इसलिए 11 माह का एग्रीमेंट ₹100 या ₹500 के नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर नोटरी कराकर निष्पादित किया जाता है।

2. उत्तर प्रदेश में किराया अनुबंध (Rent Agreement) के नए नियम 2026

उत्तर प्रदेश सरकार ने ई-रजिस्ट्रेशन सिस्टम और 1 से 10 वर्ष तक के किराया अनुबंधों पर स्टांप शुल्क व पंजीयन शुल्क में भारी कटौती की है, ताकि आम नागरिक भी बिना विवाद के कानूनी रजिस्ट्रेशन करा सकें:

वार्षिक किराया स्लैब अनुबंध अवधि नया स्टांप शुल्क पंजीयन शुल्क
श्रेणी 1:
₹1 से ₹2 लाख तक वार्षिक किराया
1 वर्ष के लिए ₹1,000 ₹1,000
1 से 5 वर्ष के लिए ₹2,000 ₹2,000
5 से 10 वर्ष के लिए ₹4,000 ₹4,000
श्रेणी 2:
₹2 लाख से ₹6 लाख तक वार्षिक किराया
1 वर्ष के लिए ₹3,000 ₹3,000
1 से 5 वर्ष के लिए ₹6,000 ₹6,000
5 से 10 वर्ष के लिए ₹8,000 ₹8,000
श्रेणी 3:
₹6 लाख से ₹10 लाख तक वार्षिक किराया
1 वर्ष के लिए ₹4,500 ₹4,500
1 से 5 वर्ष के लिए ₹10,000 ₹10,000
5 से 10 वर्ष के लिए ₹13,000 ₹13,000
⚠️ 10 वर्ष से अधिक का अनुबंध: यदि एग्रीमेंट 10 वर्ष से अधिक (उदा. 15 वर्ष) के लिए किया जाता है, तो पहले 10 वर्ष तक यह छूट वाली दर लागू होगी, जबकि शेष 5 वर्षों पर सामान्य बाजार दर से स्टांप ड्यूटी देय होगी।
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3. डाउनलोड की जाने वाली DOCX फाइल में शामिल मुख्य क्लॉज

हमारे द्वारा तैयार किए गए Lease_Agreement.docx ड्राफ्ट में भारतीय अनुबंध अधिनियम और मॉडल टेनेंसी एक्ट के सभी आवश्यक बिंदु शामिल हैं:

  1. पक्षकारों की पहचान: मकान मालिक व किराएदार का पूरा नाम, पिता का नाम, पता, मोबाइल और पहचान पत्र (PAN/Voter ID संख्या) कॉलम।
  2. परिसर का विवरण: फ्लैट, दुकान या मकान का कमरा, तल और उपयोग (आवासीय या व्यावसायिक)।
  3. किराया भुगतान एवं देय तिथि: प्रतिमाह देय राशि और भुगतान का माध्यम (Cash/Bank Transfer/UPI)।
  4. ब्याज-मुक्त धरोहर राशि (Security Deposit): खाली करते समय सुरक्षित वापसी का कानूनी क्लॉज।
  5. बिजली व पानी शुल्क: सब-मीटर रीडिंग अनुसार प्रत्यक्ष भुगतान की जिम्मेदारी।
  6. नोटिस अवधि (Termination Clause): 30 दिन (1 माह) का पूर्व लिखित नोटिस या उसके एवज में 1 माह का किराया।
  7. अवैध गतिविधि निषेध: परिसर में कोई भी गैर-कानूनी या ज्वलनशील कार्य न करने का सख्त नियम।
  8. दो गवाहों के हस्ताक्षर: कानूनी वैधता सुनिश्चित करने हेतु 2 निष्पक्ष गवाहों का सत्यापन ब्लॉक।

4. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या इस Word (.docx) फाइल को मोबाइल में एडिट किया जा सकता है? ▼
हाँ! आप इसे MS Word, WPS Office या Google Docs में खोलकर अपने नाम, पते और किराए की राशि के अनुसार 2 मिनट में एडिट कर सकते हैं।
क्या किराएनामे पर नोटरी कराना अनिवार्य है? ▼
11 महीने के एग्रीमेंट को कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए नोटरी पब्लिक (Notary Advocate) से सत्यापित कराना सबसे सुरक्षित माना जाता है। 12 महीने या अधिक होने पर उपनिबंधक कार्यालय में ई-रजिस्ट्रेशन कराना होता है।
स्टाम्प पेपर किसके नाम से खरीदा जाना चाहिए? ▼
ई-स्टाम्प सामान्यतः प्रथम पक्ष (मकान मालिक) या द्वितीय पक्ष (किराएदार) में से किसी के भी नाम से खरीदा जा सकता है, जिसमें दोनों पक्षों का नाम दर्ज होना चाहिए।